30 अप्रैल को खुलेंगे बद्रीनाथ के कपाट
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| बद्रीनाथ |
बसंत पंचमी के अवसर पर गणेश पूजन के साथ-साथ बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि भी तय की गई है बद्रीनाथ के पुजारियों के अनुसार इसमें मीन लग्न के अनुसार मंदिर के कपाट 30 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त में विधिवत पूजा अर्चना के साथ आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शनार्थ खोल जाएंगे। साथ ही साथ 7 अप्रैल को बद्री विशाल के महाभिषेक के लिए तिलों का तेल निकाला जाएगा। इसके बाद डिनर पंचायत के लोग गाड़ी घोड़ा यात्रा को लेकर अपने गंतव्य को प्रस्थान करेंगे तथा गाड़ी घोड़ा यात्रा ऋषिकेश से होते हुए श्री नगर रुद्रप्रयाग कर्णप्रयाग उमरगांव से होते हुए पांडुकेश्वर आदेश थाना पर जाने के बाद 29 अप्रैल को बदलना धाम पहुंच जाएगी और 30 अप्रैल को तिलों के तेल से भगवान बद्रीविशाल के महाभिषेक के बाद मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
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| रुद्रनाथ |
19 मई को खुलेंगे रुद्रनाथ के कपाट : 30 अप्रैल को बद्रीनाथ के कपाट खुलने के बाद 19 मई को रुद्रनाथ के भी कपाट खोल दिए जाएंगे बसंत पंचमी पर इसकी घोषणा की गई। 16 मई को गोपीनाथ मंदिर में पूजा अर्चना के बाद भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली को गोपीनाथ मंदिर से मंदिर के गर्भगृह में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाएगा 17 मई को 9:00 बजे रुद्रनाथ की उत्सव डोली शीतकालीन गद्दी स्थल के लिए अनार बुग्याल पहुंचेगी 18 मई को भक्तों के लिए भक्तों के साथ रुद्रनाथ में विश्राम के लिए पहुंचेगी और 19 मई को 7:00 बजे सुबह के 7:00 बजे पूजा अर्चना के बाद भक्तों के लिए रुद्रनाथ के कपाट खोल दिए जाएंगे।
अधिमास के कारण किया गया फैसला: बद्रीनाथ के कपाट की तिथि को समय से पहले खोलने का फैसला इसलिए किया गया क्योंकि 16 मई से 13 जून क्या बजे तक अधिमास रह सकता है इस कारण कई त्यौहारों में ध्यान घट बढ़ रही है अधिवास के कारण ही वर्ष 2018 के पहले 6 वर्ष के त्यौहार आधा महीने पहले आ रहे हैं और जो 6 महीने बाद वाले त्यौहार हैं वह आधा महीने लेट आ रहे हैं यही कारण है कि बद्रीनाथ के कपाट इस समय पहले खुल जा रहे हैं।
क्या होता है अधिमास : जब दो पक्षों में लगातार दो पक्षों में सक्रांति नहीं होती है तब अधिक मास आता है आमतौर पर 32 माह और 15 दिन यानी हर तीसरे साल में अधिमास आता है सूर्य और पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से इन तिथियों का समय घटने बढ़ने लगता है । सूर्य के सिद्धांत के अनुसार हर तीसरे वर्ष में अधिक मास होता है आज मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है हिंदू पंचांग के अनुसार अधिक मास वाले वर्ष में 13 महीने होते हैं हालांकि यह महीने पूरे अंग्रेजी के 12 महीनों में घुल मिल जाते हैं। वर्ष 2018 में 16 मई से 13 जून तक दो जेस्ट के मांस होंगे , जब ऐसे दो माह आते हैं तो इन्हें अधिमास कहा जाता है।